शुक्रवार को पांच टीम जिले में सर्वे के लिए पहुंची, गंगा बैराज, पीलीडैम पर भी इको टूरिज्म की संभावनाएं तलाशी, वन विभाग के साथ टीमों ने अलग-अलग जगह किया सर्वे।
बिजनौर: सबकुछ ठीक रहा तो जिला अब इको टूरिज्म के क्षेत्र में नया अध्याय लिखेगा। बिजनौर तहसील में जहां बारहसिंघा पुनर्वास केंद्र बनेगा तो वहीं गंगा बैराज, रावली बंधा, पीली डैम पर इको टूरिज्म शुरू होगा। इसके लिए शुक्रवार को पांच टीम जिले में पहुंची और सर्वे किया।
जिले में पर्यटन की संभावनाएं बहुत हैं। अब केवल पर्यटकों के लिए अमानगढ़ ही नहीं, बल्कि अन्य कई क्षेत्र भी तैयार किए जाएंगे। वन्य जीवों को निहारने के साथ-साथ प्रवासी और देशी पक्षियों को भी देख पाएंगेे। शुक्रवार को एक टीम बिजनौर के आसपास रामपुर ठकरा समेत हस्तिनापुर अभ्यारण्य क्षेत्र में सर्वे करने पहुंची। टीम ने वन विभाग के अफसरों के साथ सर्वे किया और बारहसिंघा पुनर्वास केंद्र खोलने की संभावनाएं तलाशी। इसके अलावा गंगा बैराज, रावली और गंगा किनारे बने बंधे, पीलीडैम, हरेवली बांध पर भी टीमें पहुंची। इन सभी जगहों पर इको टूरिज्म के लिए संभावनाएं तलाशी।
जिले में पर्यटन की अपार संभावनाएं : डीएफओ
डीएफओ अरुण कुमार सिंह ने बताया कि पांच टीमें अलग-अलग जगहों पर गई। शासन स्तर से यह टीम जिले में आई हैं। बिजनौर के पास बारह सिंघा पुनर्वास केंद्र बनने के लिए जमीन तलाशी जा रही है। वहीं अन्य जगहों पर इको टूरिज्म शुरू करने की योजना है।
सर्दियों में रहता है प्रवासी पक्षियों का बसेरा
बिजनौर गंगा बैराज पर डॉल्फिन सफारी है तो रावली बंधे के किनारे बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षी रहते हैं। यह हैदरपुर रामसर साइट क्षेत्र में आता है। इसके अलावा पीलीडैम, हरेवली में भी बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षी आते हैं। जिले में यदि इन सभी जगहों को विकसित कर दिया जाएगा तो पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
अक्तूबर से मार्च तक रहते हैं पक्षी
जिले में अलग-अलग जगहों पर करीब 300 से ज्यादा प्रजाति के प्रवासी पक्षी आते हैं। अक्तूबर से मार्च तक इन पक्षियों का बसेरा जिले में रहता है। यह पक्षी एशिया से ही नहीं, बल्कि यूरोप के कई देशों से कई हजार किलोमीटर की यात्रा कर यहां पहुंचते हैं।
दैनिक प्रथम पत्रिका से शिकुल कुमार की रिपोर्ट
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