बिजनौर न्यूज़: प्रशासन की सेटेलाइट पर नजर, सेटेलाइट की नजर में कैद हुआ पराली जलाने का मामला, एसडीएम के नेतृत्व में गठित टीम सत्यापन कर किसान को किया दंडित।
बिजनौर में पराली जलाने से प्रदूषण बढ़ता है। लेकिन क्या फैक्ट्री- कारखानों से नहीं बढ़ता प्रदूषण, क्या इनसे निकले वाला धुंआ नही करता वातावरण को प्रदूषित, क्या इनसे निकलने वाला गंदा रिफाइनरी का पानी नही करता जल को प्रदूषित, आखिर क्यों नही प्रशासन की इनपर नज़र, आखिर किसकी दया दृष्टि है इन पर ?
हम यह नहीं कहते कि किसानों पर पर्यावरण प्रदुषित करने पर कार्रवाई न हो, लेकिन जब किसानों पर कार्रवाई की जा रही है तो एक नज़र इन सभी कारखानों और फैक्ट्रीयो पर भी तो डाली जाएं। जिससे कि जनता एक स्वच्छ वातावरण में खुशहाल जीवन व्यतीत कर पाएं।
लेकिन इन सब कनीयो पर ध्यान न देते हुए; बिजनौर शासन, प्रशासन और अन्य विभाग विभिन्न माध्यमों से किसानों को पराली, पत्ती जलाने की जगह उसका प्रबंधन, जैविक खाद बनाने को प्रेरित कर रहे हैं। इसके बाद भी कुछ लोग पराली जलाते भी हैं। तो उनके पराली जलाने पर निगरानी रखने के लिए धरातल पर अधिकारियों की टीमें गठित की गई है, इतना ही नहीं और ऊपर आसमान से भी सेटेलाइन के जरिए पराली जलाने की घटनाओं पर नजर रखी जा रही है। अब कोई भी किसान गलती से भी पराली या गन्ने की पत्ती जला बैठता है तब उस पर कार्रवाई होना निश्चित है। इसलिए कोई भी किसान जानबुझकर या फिर गलती से भी पराली या पत्ती न जलाएं, पराली या पत्ती न जलाने पर आपको व आपके परिवार को एक स्वच्छ वातावारण का लाभ मिलेगा। साथ ही जुर्माना लगने से भी बच पायेंगें।
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| सांकेतिक तस्वीर |
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लेकिन प्रशासन की नज़र मे सिर्फ गरीब लाचार किसान ही आते है, इनकी टीमों व
सेटेलाइट की नज़र में बिजनौर क्षेत्र में चल रही फैक्ट्रीयों से होने वाले नियमों के उलंघन नहीं आते, जिससे फैक्ट्रीयों के आस-पास के दर्जनों गांव प्रभावित है, जहां लगातार जल और वाताबरण के प्रदूषित होने से केंसर जैसी गम्भीर बिमारियों के मामले बढ़ रहें है। आखिर क्यो ऐसे गांव पर प्रशासन की नज़र नही जाती?
इस मामले पर अपर जिला कृषि अधिकारी अमित मलिक का कहना है कि पराली जलाने के मामले में एक ही केस सामने आया है। पराली, पत्ती जलाने की जगह उसका प्रबंधन करने की किसानों को जानकारी दी जा रही है।
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दैनिक प्रथम पत्रिका से शिकुल कुमार की रिपोर्ट








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