बिजनौर: एमडी इंटर कालेज पर अभिभावकों का जमावड़ा लॉकडाउन के दौरान स्कूल बंद फिर किस बात की दें फीस ।
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लॉकडाउन के दौरान स्कूल बंद फिर किस बात की दें फीस लोग आत्महत्या कर रहें है खाने के लिए पैसा नहीं है तो फीस कहां से देंगे.
तीन महिने की फीस हो मांफ
एमडी इंटर कालेज में पढ़ रहे बच्चों के अभिभावको कि मांग है तीन महिने की फीस हो मांफ और दूसरे सभी लगें चार्ज न लिए जाएं जिनमें जनरेटर व बिल्डिंग चार्ज इत्यादि है अभिभावकों का कहना है जब हमारा बच्चा यहा पर पढ़ने के लिए नही आ रहा है तो उन चार्जों का कोई मतलब नहीं होता है,
10-05 बच्चे जुड़ते हैं
बता दें, कि इन्होंने online class चला रखी है हम मान रहें चलो ठीक है, आपके टीचर्स Online classes ले रहें है हाल तो उसमे भी स्तिथी है कि मुशकिल से मुशकिल एक क्लास में 50 बच्चे है तो उसमें से 10-05 बच्चे उसमें जुड़ जाते है क्योंकि कोई गांव का तो किसी को मोबाईल कि प्रोवलम है किसी के दो बच्चे पढ़ रहे है कोई काम पर गया है मोबाईल लेकर,
टीचर्स फीस देने के लिए तैयार
ये लोग Online classes का पैसा ले रहें चलो ठीक है, तो हम केवल इनको टीचर्स फीस देने के लिए तैयार है ओर वो भी हम जब देने के लिए तैयार है जब ये कोरोना का मामला शांत होकर हमारे बच्चे स्कूल आना शुरू कर देंगे,
हम सभी अभिभावक तैयार है
क्योंकि हम सब मीडियम क्लास आदमी है, हम सबकी आर्थिक स्थिति इतनी अच्छी नही है, कि हम इनको फीस दें सकें इन्होंने हमें फोन करकें कभी मेसेंज करके हम सभी अभिभावकों को परेशान कर रखा है, और ये भी कह रहें है कि हमारे बच्चे का नाम कांट देंगे अगर ये हमारे बच्चे का नाम कांटना चाहते है तो ठीक है हम सभी अभिभावक तैयार है, हमारे बच्चो की टीसी हमें ये काट कर तुरंत हमको दें दें, हमारा इस स्कूल से कोई मतलब वास्ता नही है,
किसी से कोई बात करायी
हमने हमारा प्रतिनिधी मंडल दो बार पहले मिल चुका है उसके ऊपर इनकी कोई कार्रवाई नहीं हुई, आज हमें कालेज के एमडी है जैन साहब उन्होनें मिलने के लिए हमसे 10 बजें का टाइम बोला था कि आप 10 बजें आ जाईयें 10 बजें से ना तो हमारी अंदर किसी से कोई बात करायी जा रही है.
हम पर ध्यान दें, हम उनकी जनता है,
हमारी मांगे चीफ मिनिस्टर योगी जी तक भी पहुंचे डीएम साहब तक भी आबाज़ पहुंचे और हमारे जिले के जितने भी प्रतिनिधी है, चाहे वो MLA, जिला पंचायत अध्यक्ष चाहे सांसद है कोई भी है वो भी हम पर ध्यान दें, हम उनकी जनता हैं.
हम लोंगो के पास विल्कुल पैसा नही
हम उनका आभार प्रकट करेंगें और हो सकता है कि उनमें से भी किसी न किसी के बच्चे किसी स्कूल में पढ़ते हो उनकी आर्थिक स्तिथी हो सकता है सही हो पर हमारी बहुत बुरी है हम लोंगो के पास विल्कुल पैसा नही है देने के लिए.


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